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Friday, 21 February 2020

बर्षों बाद श्रीनगर के मन्दिरों में धूम धाम से मनायी जा रही है महाशिवरात्रि – लोग बोले धन्यबाद मोदी जी





जम्मू-कश्मीर - महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्रीनगर में आज श्री शंकराचार्य जी मंदिर में पूजा करने के लिए भक्तों की कतार लगी हुयी है बहुत सालो बाद श्रीनगर के इस पवित्र मंदिर मे इतनी भीड़ देखी जा रही है सुरक्षा व्यवस्था ना होने और कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद से यह मंदिर लोगों के बीच कम चर्चित हो गया था

कश्मीर से धारा 370 हटने और उसे केंद्र प्रशासित प्रदेश बनाने के बाद लोगों मे यहा सुरक्षा की भावना बढ़ी है इसी वज़ह से इस साल आस पास से भी भारी मात्रा मे इस मंदिर के दर्शन करने आ रहे है।

लोगों से जब बात की गई तो लोगों ने कहा पहले यहा ऐसा माहौल नहीं होता था मगर इस बार मंदिर के तरफ से अच्छी व्यवस्था की गयी है लोगों ने मोदी जी का भी धन्यबाद किया की वो कश्मीर को विकास के एक नए रास्ते पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं

जाने श्री शंकराचार्य मंदिर का इतिहास
शंकराचार्य मंदिर जम्मू और कश्मीर राज्य के श्रीनगर शहर में डल झील के पास शंकराचार्य पर्वत पर स्थित है।यह मंदिर समुद्र तल से 1100 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

यह मंदिर कश्मीर स्थित सबसे पुराने मंदिरों में से एक है।
इस मंदिर का निर्माण राजा गोपादात्य ने 371 ई. पूर्व में करवाया था।
डोगरा शासक महाराजा गुलाब सिंह ने मंदिर तक पँहुचने के लिए सीढ़ियाँ बनवाई थी।




इस मंदिर की वास्तुकला भी काफ़ी ख़ूबसूरत है।शिव का यह मंदिर क़रीब दो सौ साल पुराना है।जगदगुरु शंकराचार्य अपनी भारत यात्रा के दौरान यहाँ आये थे।

उनका साधना स्थल आज भी यहाँ बना हुआ है। ऊँचाई पर होने के कारण यहाँ से श्रीनगर और डल झील का बेहद ख़ूबसूरत नज़ारा दिखाई देता है।




200 साल पुराना यह मंदिर अपने आप मे बहुत सी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं से जुड़ी है इतिहास मे इस मंदिर को कई बार नुकसान पहुचाने की कोशिश की गई मगर भगवान शंकर का ये मंदिर अभी भी श्रीनगर मे श्रद्धालू का एक महत्वपूर्ण केंद्र है जहाँ भक्त दर्शन करने भारी तादाद मे आने लगे है।


ऐजेंसी । 

टिकट पाने की उम्मीद में शाखा न आयें , लोभ लालच सिद्ध नहीं होगा, हिंदुत्व है संघ का मूलमंत्र - मोहन भागवत




झारखंड - संघ समागम" में हिस्सा लेने झारखंड की राजधानी राँची पहुंचे RSS प्रमुख मोहन भागवत ने हजारों स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि, "टिकट लेने की आस में शाखा में न आएं, यहाँ किसी भी प्रकार का लोभ लालच सिद्ध नहीं होगा। पद का लालच लेकर संघ से जुड़ने वालों के लिए संघ में कोई जगह नहीं है। संघ में आना है तो कुछ लेने के लिए मत आइये, बल्कि देने के लिए आइये।"

राँची में रामदयाल मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में "संघ समागम" में हिस्सा लेने आये हजारों स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए RSS प्रमुुुख मोहन भागवत ने कहा कि, "हमें राष्ट्रवाद शब्द से बचना चाहिए क्योंकि इसका अर्थ हिटलर और नाजी से निकाला जा सकता है। उन्होंने "राष्ट्र और राष्ट्रीय" जैसे शब्दों को प्रमुखता से इस्तेमाल करने की बात कही। उन्होंने आगे कहा कि हिंन्दू भारत के सभी धर्मों की अगुवाई करता है जो सभी को एकसूत्र में जोड़ता है।"

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि दुनियाँ के सामने जो बड़ी समस्याएं हैं उससे भारत ही निपट सकता है। संघ देश में विस्तार के साथ साथ हिंदुत्व के एजेंडे पर आगे बढ़ता रहेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि मानवता के साथ जीने के लिए देश से प्यार करना जरूरी है और हम अपने कार्यकर्ताओं को यही सीख देते हैं। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा  कि RSS का विस्तार देश के लिए है और लक्ष्य भारत को विश्वगुरु बनाना है ।

Thursday, 13 February 2020

शिवसैनिकों का मनसे में शामिल होना शुरू बड़े हिन्दूवादी नेता के रूप में उभर सकते हैं राज ठाकरे





मुंबई - हाल ही में एक अहम निर्णय में शिवसेना के कई नेता और पूर्व विधायक महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना में शामिल होते दिखाई दिये। पूर्व शिवसेना विधायक हर्षवर्धन जाधव और दिवंगत भाजपा नेता प्रमोद महाजन के भाई प्रकाश महाजन ने एक बार फिर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना में वापसी की है। दोनों ने दादर में स्थित राज ठाकरे के निवास पर एमएनएस (मनसे) में पुनः सदस्यता ग्रहण की है।

इससे एक बात तो स्पष्ट होती है, कि राज ठाकरे ने ना सिर्फ अपनी पार्टी में एक नई जान फूंक दी है, बल्कि सत्ता के लालच में उद्धव ठाकरे द्वारा त्यागे गए हिन्दुत्व के विरासत पर अधिकार जमाने के लिए वह पूरी तरह तैयार हैं। आज के ही दिन यानि 9 फरवरी को राज ठाकरे ने सीएए के समर्थन और अवैध घुसपैठियों को दी जा रही राजनैतिक शह के विरुद्ध मुंबई में मोर्चा निकालेंगे। शिवसेना के एक नेता के अनुसार राज ठाकरे अपने चाचा और शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब केशव ठाकरे के नक्शे कदम पर चल रहे हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि अब शिवसेना के नेताओं को भी राज ठाकरे में हिन्दुत्व के विचारधारा को आगे बढ़ाने की उम्मीद दिख रही है।


बता दें कि 2019 के महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना ने आवश्यक बहुमत हासिल करते हुए एक बार फिर सत्ता में जगह बनाई। परंतु सत्ता के लालच में उद्धव ठाकरे ने न केवल भाजपा का साथ छोड़ा, अपितु सत्ता की लालसा में उसने हिन्दुत्व की विचारधारा को भी किनारे रख दिया, जिसके आधार पर शिवसेना ने कई वर्षों तक महाराष्ट्र की जनता के हृदय में अपना स्थान बनाए रखा था।

परंतु यह समय राज ठाकरे के लिए मानों किसी सुनहरे अवसर से कम नहीं था।उन्होंने अपने तेवर बदलते हुए अपनी पार्टी का उद्देश्य और रंग रूप दोनों ही बदल दिये। 23 जनवरी को बालासाहेब ठाकरे के जन्मदिन की वर्षगांठ पर राज ठाकरे ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नए रूप से सभी को परिचित कराया। प्रचार प्रसार के दौरान ही स्पष्ट हो चुका था कि राज ठाकरे अपने चाचा बाल ठाकरे के हिन्दुत्व की विरासत को संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। महा अधिवेशन के लिए जारी किए गए एक पोस्टर में मराठी मानुष के बाद हिन्दुत्व का ही रंग नजर आ रहा था। पूरा पोस्टर भगवे रंग से रंगा था और लिखा था “महाराष्ट्र धर्म के बारे में सोचो, हिन्दू स्वराज्य का निर्धारण करो।”
इतना ही नहीं, एमएनएस के महाअधिवेशन में राज ठाकरे ने हिन्दुत्व के प्रति अपनी निष्ठा को सिद्ध करने के लिए कई क्रांतिकारी निर्णय लिए। एमएनएस का झंडा पूर्णत: भगवामय दिख रहा था और इसके साथ ही पार्टी के प्रतीक चिन्ह के तौर पर मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रसिद्ध राजमुद्रा को चुना।

इतना ही नहीं, राज ठाकरे ने सीएए के समर्थन में अपनी बात आगे रखते हुए कहा, “यदि हिन्दुत्व पर कोई हमला होगा, तो मैं उसकी रक्षा में अपना सर्वस्व अर्पण कर दूँगा। हाँ, मैंने मोदी की आलोचना की है, पर जब वे सही थे, तो मैंने उनका समर्थन भी किया है। मैं उन लोगों का पक्ष कभी नहीं लूँगा जो सत्ता में बने रहने के लिए अपना रंग बदल दें”।

बांग्लादेशी घुसपैठियों पर जब उनकी राय पूछी गयी, तब उन्होंने बताया, “पाकिस्तान, बांग्लादेश से आए मुस्लिम घुसपैठियों को देश से बाहर करने के लिए केंद्र सरकार का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि इस देश में आए हुए बांग्लादेशी और पाकिस्तानी मुसलमानों को निकालने की जरूरत है। गृहमंत्री से मांग करेंगे, हम बम पर बैठे हैं।

हम बांग्लादेशी और पाकिस्तानी मुसलमानों को देश से बाहर निकालने के लिए 9 फरवरी को मोर्चा निकालेंगे। आज नागरिकता कानून पर जो चल रहा है, ठीक है, बहस हो सकती है। पर कौन, कैसा है? यह पुलिस सब जानती है। ये जो CAA, NRC के खिलाफ मुसलमान रोज मोर्चा निकाल रहे हैं, मुझे बताया गया कि 370 और राम मंदिर का गुस्सा CAA, NRC के बहाने निकाल रहे हैं”।

सच कहें तो राज ठाकरे ने अब उद्धव ठाकरे द्वारा हिन्दुत्व की विरासत पर एकमुश्त दावे को चुनौती देकर महाराष्ट्र की राजनीति को एक नया आयाम दे दिया है। उद्धव ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ शिवसेना की सरकार बना कर हिन्दुत्व की विचारधारा को जो नुकसान पहुंचाया, उसकी क्षतिपूर्ति करने में राज ठाकरे कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं और अब शिवसेना के कई नेता भी इस बात को स्वीकार रहे हैं कि बालासाहेब ठाकरे के हिन्दुत्व को यदि कोई सही से संभाल सकता है, तो वो राज ठाकरे ही हैं।


VK NEWS

दिल्ली के नये विधायकों में आधे विधायक गम्भीर अपराध में शामिल 43 पर दर्ज हैं दुष्कर्म और हत्या के प्रयास के मामले




नई दिल्ली - दिल्ली में हुये विधानसभा चुनाव में लोगों ने भले ही अपनी सुख-सुविधाओं को देखते हुये वोट किया हो लेकिन मत देकर उन्होंने आपराधिक मामलों के आरोपियों को विधानसभा पहुंचा दिया है। दिल्ली में चुने गये 70 नये विधायकों में 37 यानी करीब 53 फीसद विधायकों ने खुद पर गंभीर मामलों के अपराध घोषित किये हैं। इनमें कई पर बलात्कार के आरोप, हत्या की कोशिश और महिलाओं के खिलाफ अपराध के आरोप हैं। इन्हीं 70 विधायकों में 43 विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

यह आंकड़े चुनाव पर दिल्ली इलेक्शन वाच और एसोसिएशन डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) की ओर से चुनाव परिणाम जारी होने के एक दिन बाद बुधवार को जारी किये गये हैं। जानकारी का आंकड़ा चुनाव आयोग में उम्मीदवारों की ओर से जमा किये गये हलफनामे से लिया गया है। जानकारी के मुताबिक 2015 में 70 में से सिर्फ 24 विधायकों ने ही आपराधिक मामलों की बात स्वीकारी थी।

2015 में जहाँ गंभीर अपराधों के साथ 20 फीसद विधायक ही सामने आये थे, वहीं इस बार 2020 में यह आंकड़ा बढ़कर 53 फीसद पर पहुंच गया है। पार्टी के आधार पर देखें तो आम आदमी पार्टी के 2015 में 3 फीसद विधायकों पर आपराधिक मामले थे तो वहीं 2020 में ये मामले 61 फीसद हैं। 2015 में भाजपा के जहां 33 फीसद विधायक आपराधिक मामलों के थे वहीं इस बार 2020 में आंकड़ा बढ़कर 63 फीसद पर पहुंच गया है।

आम आदमी पार्टी के कई विधायक हैं करोड़पति

सबसे ज्यादा विधायक बनने वाले भले ही आम आदमी पार्टी (आप) से हों लेकिन असल में उनकी संपत्ति चौंकाने वाली है। विधायक बन चुके आम आदमी पार्टी के 62 विधायकों में 73 फीसद यानी 45 विधायक करोड़पति हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में 70 विधायकों में 63 फीसद यानी 44 विधायक ही करोड़पति की सूची में शामिल थे। भाजपा में देखें तो उनके 8 में से 7 विधायक यानी 88 फीसद विधायकों ने अपनी संपत्ति एक करोड़ रुपये से अधिक बताई है। जानकारी के बाकी पेज 8 पर मुताबिक, 36 फीसद विधायकों की संपत्ति पांच करोड़ रुपये से अधिक है। 18 फीसद विधायक ऐसे हैं जिनकी संपत्ति दो करोड़ से पांच करोड़ रुपये के बीच है। 29 फीसद विधायकों की कुल संपत्ति 50 लाख से दो करोड़ रुपये के बीच है। 16 फीसद विधायक ऐसे हैं जिनके पास 10 लाख से 50 लाख रुपये की संपत्ति है। एक फीसद विधायकों के पास दस लाख रुपये से कम संपत्ति की घोषणा की गयी है।

सबसे ज्यादा संपत्ति मुंडका से आम आदमी पार्टी विधायक धरमपाल लाकड़ की है। कुल संपत्ति 292 करोड़ रुपये बताई गई है। दूसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी की ही आरकेपुरम से विधायक प्रमिला टोकस हैं जिनके पास कुल 80 करोड़ रुपये की संपत्ति है। तीसरे नंबर पर पटेल नगर से ‘आप’ विधायक राजकुमार आनंद हैं जिनकी कुल 78 करोड़ रुपये की संपत्ति है। वहीं, सबसे कम संपत्ति में भी आप के तीन विधायक शामिल हैं। इसमें मंगोलपुरी से विधायक राखी विडलान जिनके पास कुल 76 हजार रुपये, बुराड़ी से विधायक संजीव झा के पास 10 लाख रुपये और सदर बाजार से विधायक सोम दत्त के पास 11 लाख रुपये की संपत्ति दिखाई गयी है।


कितने पढ़े लिखे हैं दिल्ली के विधायक

कुल विधायकों में 23 विधायक यानी 33 फीसद आठ से 12वीं पास हैं। 42 विधायक यानी 60 फीसद स्नातक और उससे अधिक पढ़े हैं। पांच विधायक डिप्लोमा धारक हैं। 39 विधायक 25 से 50 साल के बीच हैं। 31 विधायकों की उम्र 51 से 80 साल के बीच है। 2015 में जहां 70 में सिर्फ 6 महिला विधायक चुनी गर्इं थीं वहीं इस बार यह आंकड़ा सिर्फ दो अंक बढ़ गया है यानी आठ हो गया है।

Wednesday, 29 January 2020

उत्तर प्रदेश के डीजीपी की बड़ी कार्यवाही अब सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक को भी देना होगा चल-अचल सम्पत्ति का ब्यौरा





उत्तर प्रदेश - अब एएसपी से सिपाहियों तक को हर साल देना होगा सम्पति का ब्यौरा डीजीपी ने शासन को लिखा पत्र

उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओपी सिंह ने एक बड़ा कदम उठाते हुये शासन को पत्र लिखकर इंस्पेक्टर से सिपाही तक के अराजपत्रित पुलिस अधिकारियों व कर्मियों के लिए प्रति वर्ष अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा अनिवार्य रूप से देने का नियम लागू करने की सिफारिश की है. ऐसा माना जा हा रहा है कि डीजीपी ओपी सिंह के इस कदम से भ्रष्टाचार में काफी हद तक लगाम लगेगी ।


नियमावली मजबूत बनाने की जरूरत

जानकारी के मुताबिक, डीजीपी ओपी सिंह के कार्यकाल में यूपी पुलिस में कई बड़े फैसले लिये गये हैं जिसमे कमिश्नर प्रणाली भी शामिल है इसके बाद अब शासन से की गयी इस सिराफिश से भी पुलिस की कार्य प्रणाली में बड़ा बदलाव आने वाला है । दरअसल डीजीपी का मानना है कि उप्र पुलिस में संपूर्ण शुचिता व पारदर्शिता लाने के लिये चल-अचल संपत्ति का विवरण नियमित रूप से दिये जाने के लिये नियमावली को और मजबूत बनाने की जरूरत है ।

इसी के चलते उन्होंने शासन को पत्र लिखकर इंस्पेक्टर से सिपाही तक के अराजपत्रित पुलिस अधिकारियों व कर्मियों के लिए प्रतिवर्ष अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा अनिवार्य रूप से देने का नियम लागू करने की सिफारिश की है इतना ही नहीं डीजीपी ने पीपीएस संवर्ग के अधिकारियों के लिए पांच साल के बजाय अब हर साल संपत्ति का ब्योरा देने की अनिवार्यता लागू किये जाने की बात भी कही है । 

अब तक सिर्फ आईपीएस देते थे ब्यौरा

आपको बता दें कि अभी तक सिर्फ आईपीएस अफसर अपनी सम्पति का ब्यौरा 15 जनवरी तक देते थे. ये उनके लिये एक अनिवार्य प्रक्रिया होती थी डीजीपी ने इसे प्रति वर्ष अनिवार्य किये जाने के साथ ही अराजपत्रित पुलिस अधिकारियों व कर्मियों से भी संपत्ति का ब्योरा लेने की सिफारिश की है । 

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Thursday, 23 January 2020

असम में 8 उग्रवादी संगठनों के 644 सदस्यों ने 177 हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पण





असम - असम में बड़ी संख्या में उग्रवादियों ने सरेंडर किया है। मुख्यमन्त्री सर्बानंद सोनोवाल की मौजूदगी में असम में आठ प्रतिबंधित संगठनों के 644 उग्रवादियों ने 177 हथियारों के साथ गुरुवार को आत्मसमर्पण किया। पुलिस ने बताया कि उल्फा (आई), एनडीएफबी, आरएनएलएफ, केएलओ, भाकपा (माओवादी), एनएसएलए, एडीएफ और एनएलएफबी के सदस्यों ने एक कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की मौजूदगी में आत्मसमर्पण किया।




पुलिस महानिदेशक ज्योति महंता ने पत्रकारों से कहा, 'राज्य के लिये और असम पुलिस के लिए यह एक महत्वपूर्ण दिन है। आठ उग्रवादी समूहों के कुल 644 कार्यकर्ताओं और नेताओं ने आत्मसमर्पण किया है।

उन्होंने कहा कि काफी समय बाद इतनी बड़ी संख्या में माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है।

मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ ने सीएए के समर्थन में कानपुर में की जनसभा


 
कानपुर - सीएए के समर्थन में किदवईनगर में आयोजित जनसभा में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष पाकिस्तान की भाषा बोल रहा है और लोगों को भड़का रहा है। इसलिए जनता के सामने राहुल और प्रियंका जैसों को बेनकाब किया जायेगा।
कानपुर. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को नागरिकता संशोधन कानून के प्रचार के लिए कानपुर में सभा की। उन्होंने कहा- पाकिस्तान बनाने का पाप कांग्रेस ने किया था। वहां, हिंदू, जैन, पारसी, सिखों पर हमले हो रहे हैं। हम उनको नागरिकता देंगे सपा, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों में इतनी हिम्मत नहीं कि ये खुद कोई आंदोलन करें इन लोगों के द्वारा अब अपनी औरतों और बच्चों को चौराहे चौराहे बैठाया जा रहा है, जबकि पुरुष घर में आराम कर रहे हैं।




उन्होंने कहा जिन महिलाओं को मालूम ही नहीं कि सीएए क्या है ? उन लोगों को आगे किया जा रहा है। पूछने पर पुरुष कहते हैं कि हम अब अक्षम हैं हमने आतंकवाद के ताबूत में अंतिम कील ठोंकने का काम किया है।
जनसभा में भाजपा कार्यकर्ताओ ने पदाधिकारियों के साथ बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।

इस दौरान भाजपा कानपुर ग्रामीण के निवर्तमान जिला मंत्री दिनेश सिंह कुशवाहा भी 124 गाड़ियों के काफिले के साथ कार्यक्रम में पहुँचे। जिनमे रिंकू शर्मा, सागर कुशवाहा, सौरभ कुमार, श्रीकांत सविता, गोलू ठाकुर, धीरू यादव, अजय कुशवाहा, भानू प्रताप, विजय कुशवाहा, विश्वजीत सिंह, कृष्णकान्त रामराज, विशाल सिंह, प्रांजुल बाजपेयी, दीप मिश्र आदि लोग उपस्थित रहे।

रिपोर्ट - अजय कुमार । 
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