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Tuesday, 24 October 2017

पासपोर्ट जांच के नाम पर जारी है वूसली का खेल





संवाददाता : मधुसूदन यादव
विभागीय मिली भगत से जांच के नाम पर आवेदकों से की जा रही 5सौ से 2हजार रू0 तक की वसूली


कानपुर नगर, कुछ समय पहले समचारपत्रो में पासपोर्ट की जांच को लेकर एलआईयू द्वारा खेले जा रहे खेल का बडा ख्ुालासा किया गया था, जिसके बाद पासपोर्ट विभाग में हडकंप मच गया था। विभागीय अधिकारी भी सकते में थे कि अन्दर की बात बाहर कैसे पहुंची, फिलहाल उच्चाधिकारियों के संज्ञान में मामला आया और सख्ती बरती गयी लेकिन समय बीतने के साथ ही हलात फिर पहले जैसे हो चुके है। फिर वही तरीका अपनाया जाने लगा है और लोगों से पासपोर्ट की जांच के नाम पर वसूली की जा रही है।
 पासपोर्ट बनाने में जांच को लेकर एक बडा खेल एलआईयू द्वारा खेला जा रहा है, जबकि पासपोर्ट बनाने में एलआईयू जांच बंद की जा चुकी है। पूर्व में खबर निकलने के बाद कुछ दिनो तक तो खेल बंद रहा लेकिन एक बार फिर शुरू हो गया है। एलआईयू कर्मी पासपोर्ट बनवाने वाले के यहां आवेदन की फोटो काॅपी लेकर पहुंच रहे है और जांच के नाम पर 5सौ से 2 हजार रू0 तक वसूल कर रहे है, जबकि यह जांच अब थाना सतर तक ही री गयी है। थाने की संस्तुति के बाद एलआईयू कार्यालय में इसमें केवल ठप्पा मात्र ही लगाया जाता है लेकिन एलआईयू कर्मी आवेदकों से उगाही करने में बाज नही आ रहें है। पासपोर्ट बनवाने में एलआईयू विभाग में देरी लग जाती थी और आवेदकों को चक्कर काटने पडते थे। पूर्व में एक शासनादेश आया था कि आवेदन की स्थानीय अभिसूचना इकाई आवेदक के घर जाकर अब जांच नही करेगी, जिसकी अनिवार्यता समाप्त कर दी गयी है और जांच केवल थाना स्तर से ही पूरी की जायेगी, लेकिन महज वसूली के चक्कर में एलआईयू कर्मचारी इसे वसूली का जरिया बनाये हुए है। शहर में जाजमऊ, कैंट, बाबू पुरवा जैसे कुछ खास क्षेत्र है जहां पासपोर्ट के आवेदन अधिक होते है। इस बीत का एलआईयू जमकर वसूली करता है। सूत्र बताते है कि जांच को बंद किये काफी समय हो गया है लेकिन जांच के नाम पर वसूली का खेल अभी तक बंद नही हो पाया है।

ऊपर से लेकर नीचे तक की सेटिंग करके यह वसूली का खुला खेल खेला जा रहा है। होता यह है कि थाने से जांच के बाद आवेदन रिपोर्ट के साथ एसएसपी कार्यालय स्थित एलआईयू आॅफिस में आ जाता है यहां से एलआइ्रयू के बीट प्रभारी व कर्मचारी इस आवेदन की फोटो काॅपी करा लेते है और जांच के नाम पर आवेदकों के घर पहंच जाते है। यह पूरा काम फर्जी है। अब आवेदक यह नही जानता की इस प्रकार की जांच बंद हो चुकी है वह एलआईयू के नाम पर पुनः पूरी जानकारी देता है। वहीं एलआईयू अपनी हनक किसी अधिकारी के रूप में दिखाते हुए वसूली करते है। वैसे तो शहर भर से पासपोर्ट के आवेदन होते है लेकिन कुछ खास बीट पर इन एलआईयू कर्मियों की पौवारा होती है। इन कमाई वाली बीटों में कैंट, बाबू पुरवा, गोविन्द नगर, कल्यानपुर सहित कुछ अन्य इलाके है जहां इस प्रकार की फर्जी जांच पर खुली वसूली चल रही है। सूत्रों की माने तो इस स्थानो के लिए लगभग 3 सौ आवेदन फार्म निकलते है, जिनमें एलआईयू कर्मी प्रति आवेदन जांच के नाम पर 5सौ से 2 हजार रू0 तक वसूल कर लेते है। अधिकांश आवेदकों को एलआईयू जांच समाप्त हो जाने की जानकारी ही नही है। यह खेल ऐसे नही चल रहा है बल्कि इस उगाही का कुछ हिस्सा ऊपर के लोगों तक भी पहुच रहा है।

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