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Sunday, 26 November 2017

बेजुबानो पर हो रही क्रूरता पर नही जाग रहे अधिकारी

जादूगर ओपी शर्मा पर बेजुबान जानवरो और पक्षिंयों पर कू्ररतापूर्ण व्यवहार करने का लगाया गया था आरोप की गयी थी प्रशासन व शासन स्तर तक लिखित शिकायत

आई0जी0आर0एस पोर्टल पर शिकायत को कर दिया गया निस्तारित

शासन स्तर पर जांच के आदेश पर क्षेत्राधिकारी बाबूपुरवा ने कहा नही है उनके थानाक्षेत्र का मामला, शिकायत को बर्रा थाना व वन विभाग भेजने को लिखकर कर दिया निस्तारण

वन अधिकारी ने माना कि पशु-पंक्षियों को किसी भी एक्अीविटी में शामिल करना और कराना आता है अपराध की श्रेणी में

भारत देश में सुप्रीमकोर्ट के आदेश को ढेंगा दिखाकर पशु-पंक्षियों के साथ की जा रही क्रूरता।

जादूगर ओपी शर्मा का निवास भूत बंगला
जादूगर ओपी शर्मा द्वारा पंक्षियों के साथ दिखाया जाने वाला करतब
कानपुर नगर(हरिओम गुप्ता) शहर में ही नही बल्कि पूरे देश में वर्तमान में पशुओं और पंक्षियों के साथ जिस प्रकार क्रूरता बरती जा रही है यह चिंता का विषय है, जबकि देश की सबसे बडी अदालत सुप्रीम कोर्ट के द्वारा यह व्यवस्था दी गयी है कि किसी भी पशु पं़क्षी का स्वतंत्रा विचरण करना उनका अधिकार है, यदि ऐसा करने से कोई भी व्यक्ति पशु-पक्षियों को रोकता है या उन्हे कैद कर उनसे व्यापरिक लाभ अर्जित करता है तो वह अपराध की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद देश भर में पशु पंक्षियों को बंधक बनाकर रखा जाता है, जिन्हे बेचा जाता है और उनके लाभ प्राप्त करने के लिए एक्अीविटी कराई जाती है। आमतौर पर सडको पर ही घोडा, बैल, भैंसा आदि को जिस प्रकार बंधक बनाकर उनसे काम लिया जाता है तथा बहेलियों द्वारा तोता, चिडिया, मैना, कबूतर को कैद कर बेंचा जा रहा है यह नियमो के विरूद्ध है,  लेकिन इस देश में आजादी के बाद किसी प्रकार के नियमों की कोई अहमियत नही है, जिसकी जो मर्जी है वह करता है। कारण यह भी है कि नियमों को मानने और मनवाने वाले ही लापरवाही बररते है। ऐसे मे इन बेजुबानों पर हो रहे अत्याचार में कमी नही आ रही है और बेसस तथा कमजोर होकर ये बेजुबान अंत में अपने प्राण त्याग देते है।आज मौजूदा समय में हमारे आस-पास चारो ओर पशुओ और पंक्षियो के साथ कहीं न कहीं किसी प्रकार से क्रूरता बरती जा रही है, चाहे वह पशुओ को जोत कर भाडा कमाने का काम हो या फिर पंक्षियो को कैद कर जादू दिखाने का, अर्थ के चलते सभी इन बेजुबानों का प्रयोग कर रहे है जो हमारे संविधान के खिलाफ है। जहां हमारी न्याय व्यवस्था में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 के तहत पशु, पक्षिंयों को संरक्षण दिया जाता है तो वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेशो को अनसुनी कर नियमों की धज्जिया उडाई जा रही है। शहर में ही नही देश-विदेश में नाम कमाने वाले प्रसिद्ध जादूगर ओपी शर्मा जो बर्रा में अपने भूतबंगले में रहते है वह खुले आम सुप्रीम कोर्ट व पशु क्रूरता अधिनियम की धज्जियां उडाते दिखाई देते है। कुछ समय पहले ही शहर के एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र ने उनके जादू के शो के दौरान पशु पंक्षियों से एक्टिविटी कराने को लेकर एक लेख भी छपा था, जिसपर जिलाधिकारी सुरेन्द्र सिंह ने कहा था के पशु-पंक्षियों को टार्चर करना अपराध है साथ ही कहा था कि जादू में इनका शामिल करना अपराध है या नही इसकी जानकारी वन विभाग से ली जा सकती है,तो वहीं जिला वन अधिकारी एसएम श्रीवास्तव ने माना था कि पशु पंक्षियों को कैद कर किसी भी एक्टिविटी में शामिल करना सीधे अपराध की श्रेणी में आता है और यह गलत है। उन्होने कहा था कि यदि जादू के दौरान इनका उपयोग किया गया तो इसकी परमीशन जादूगर के पास थी कि नही इसकी जानकारी की जायेगी।

किस प्रकार होता है पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का उल्लघंन

शहर ही नही बल्कि पूरे देश में जादू दिखाने वाले जादूगर अपने शो के दौरान पंक्षियों और पशुओं का उपयोग करते है तथा उनके द्वारा दर्शकों को रोमाचिंत करने वाली एक्टिविटीस दिखाते है लेकिन जादूगर की उंगलियों पर नाचने वाले यह जानवर और पंक्षी ऐसे ही कुछ नही करते बल्कि उन्हे सिखाने के दौरान उनपर जुल्म किया जाता है और डरकर जानवर तथा पंक्षी जादूगर के संकेत सीखते है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि आसमान में विचरण करने वाले पंक्षियों की इन जादूगरो, बहेलियों ने आजादी छीन ली है और आज इनकी सुध लेने वाला कोई नही है। हमारे संविधान को देश में प्रमुख माना जाता है लेकिन देश के बडे नेताओ और अधिकारियों के सामने ही इस प्रकार से संविधान के अधिनियमों का उल्लघन किया जाता है तो फिर इस देश में संविधान के मायने ही क्या है। अमित बाजपेई ने कहा कि यदि प्रशासन व शासन स्तर पर इस गंभीर विषय पर कार्यवाही नही की गयी तो वह शीध्र ही उच्च न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होंगे।

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