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Friday, 12 January 2018

मौत की नींद सुलाते शहर के नर्सिंग होम

मौत की नींद सुलाते शहर के नर्सिंग होम


- किसने दिया अधिकार डालो गरीबों की जेब में डांका

- भरपूर पैसा देने के बाद भी मरीज की जिन्दगी रहती है दाँव पर 

- कानपुर दक्षिण के नर्सिंग होम बने सबसे बड़े मौत के सौदागर

कानपुर महानगर| (सर्वोत्तम तिवारी) शहर के नर्सिंग होम जीते जी इंसान को मौत की नींद सुला रहे हैं यह बात किसी से छिपी नहीं है| गली-गली, चौराहे-चौराहे कदम फैला रही यह प्राइवेट अस्पताल रूपी मौत की दुकानें खुले आम मौत बाँट रहे हैं| जिसका जीता जागता उदाहरण है कि विगत दिनों आर्यनगर स्थित एक बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल में मरीज की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ| मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाये| हो हल्ले और हंगामे में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी|
लेकिन सोंचने वाली बात है कि आखिर इनको मौत का सौदागर बनने का अधिकार किसने दिया|

इन नर्सिंग होमों में मरीज को चिकित्सा सेवायें मुहैया कराने के नाम पर प्रति दिन का "भारी-भरकम बजट" का खर्च उठाना पड़ता है| उसके बाद भी मरीज की जान बचेगी या नहीं उसकी कोई गारंटी नहीं होती है| क्योंकि इन मौत की दुकानों में झोला छाप डॉक्टर अपनी प्रैक्टिस करते हैं और नये नये फार्मूलों का प्रयोग मरीज की जान का दुश्मन बनता है| मरीज की मौत के बाद अपनी जेब लुटवा चुके परिजन सिर्फ रोने चिल्लाने के अलावा कुछ नहीं कर पाते क्योंकि अस्पताल के अंदर इन्ट्री करते ही अस्पताल प्रबन्धन मरीज के परिजनों से एक फार्म पर साइन करवा लेता है कि मरीज को कुछ हो जाये तो अस्पताल और डॉ0 की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी|
बस इस फार्म में साइन होते ही इन मौत के घरों में मानों झोला छाप डॉक्टरों को मरीज की जान से खेलने का लाइसेंस मिल गया हो, तभी तो किसी भी हद तक मरीजों की जान से खेलते-खेलते उनकी जीवन लीला समाप्त करते हैं|
जानकार बताते हैं इन प्राइवेट अस्पतालों में सरकारी डॉक्टरों की दुकानें भी खूब चलती हैं तभी तो यह पूरी ठेकेदारी से जनमानस में मौत बाँट रहे हैं| बताया तो यहां तक जाता है कि इन अस्पतालों में कई बार मरीज को आईसीयू में रखकर मोटी रकम वसूली जाती है और मरीज से उसके परिजनों को मिलने तक नहीं दिया जाता|
कई बार तो इन नर्सिंग होमों पर यह भी आरोप लग चुके हैं कि मरीज की मौत आईसीयू में हो गई फिर भी प्रतिदिन का बजट वसूलने के चक्कर मे परिजनों जो बताया तक नहीं जाता| जानकारी होने पर खूब हंगामे भी हुये हैं|
कानपुर दक्षिण में भी एक अस्पताल में हुई मरीज की मौत पर अस्पताल प्रबन्धन पर कई संगीन आरोप लगे थे| हुये जमकर हंगामे से इन नर्सिंग होमों की खूब थू-थू हुई थी| कानपुर दक्षिण क्षेत्र के प्रिया हॉस्पिटल, पी0पी0एम0 हॉस्पिटल, जयराम हॉस्पिटल, मानदेय हॉस्पिटल, के साथ-साथ कई ऐसे प्राइवेट नर्सिंग होम ऐसे आरोपों से अछूते नहीं हैं|
बिन मानक के धड़ल्ले से चल रहे ये प्राइवेट नर्सिंग होम शहरियों को खुले आम मौत की नींद सुलाते हैं|

स्थिति सोंचनीय है कि आखिर इनको मौत का सौदागर बनने का हक किसने दिया?

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