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Wednesday, 17 October 2018

आखिर कब अंत होगा समाज में घुसे रावणों का

मंथन - जैसा की वर्तमान समय में नवरात्रि का पर्व चल रहा हैं लोग मां की उपासना में सराबोर हैं। जहां देखो जिधर सुनो मां के जय जयकार की गूंज कानों में दस्तक दे रही हैं। कहीं छोटी छोटी बच्चियों को कन्याभोज कराया जा रहा हैं.कहीं मां के नाम के भंडारे चल रहे हैं।

 नवरात्र के बाद एक पर्व और आता हैं विजयदशमी जिसे हम दशहरा के नाम से भी जानते हैं। कहते हैं इसी दिन भगवान श्री राम ने लंका पति रावण का वध किया था। ये वही रावण था जिसने माता सीता पर बुरी नजर डाली थी जिसके फलस्वरूप उसे और उसकी सोने की लंका को नष्ट कर दिया गया था। तब से हम हर वर्ष दशहरा के दिन रावण का दहन करते चले आ रहे हैं। 

पर मेरा सवाल हैं समाज के हर वर्ग से की आज जो बलात्कारी रावण घूम रहे हैं हम उन्हें कब सजा देंगे कब समाज में बलात्कारियों का बहिष्कार किया जायेगा मेरे ख्याल से जब तक़ हम बलात्कारियों को यूं ही रावण दहन की तरह सजा नही देंगे तबतक देश में बलात्कार जैसे संगीन अपराध पर पूर्णतया अंकुश नही लगाया जा सकता। मेरा अभिप्राय हैं जिस प्रकार हम रावण को बीच मैदान में हजारों लाखों की भीड़ में जलाते हैं उसी प्रकार बलात्कारियों को भी बीच चौराहे पर उनका दहन करना चाहिये। 

ये तो बात हुई बलात्कारी रावण की अब बात करते हैं भ्रष्टाचारी रावण व मिलावट खोर रावण की जो समाज को खोखला करने का काम कर रहे हैं।खाद्य समाग्री में मिलावट करने वाले व इन मिलावटखोरों पर कार्यवाही न करने वाले भी रावण की श्रेणी में आते हैं। जितने लोग अपने कार्य के प्रति ईमानदार नही हैं जो लोग अपने काम को ग़लत तरीके से करते हैं लापरवाही करते हैं वास्तव में ये सब रावण की ही श्रेणी में आते हैं जबतक़ समाज में ये रावण विचरण कर रहे हैं तब तक अच्छे समाज की कल्पना नही की जा सकती।

लेखक - अमित कश्यप,कानपुर।

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