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Thursday, 25 July 2019

खनन माफिया को नेता पुलिस और दलाल पत्रकार का संरक्षण


        काल्पनिक चित्र 

कानपुर - सरकार से लेकर पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद खनन माफियाओं की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है खनन बंद करने की बात तो दूर खनन माफियाओं में अधिकारियों तक का खौफ नहीं है।
सूत्रों की माने तो खनन माफियाओं को सत्ताधारी पक्ष से लेकर सत्ताधारी नेता, नेताओं के रिश्तेदार, ग्राम प्रधान, लेखपाल, सेक्रेटरी, पुलिस और दलाल पत्रकारों का भी संरक्षण प्राप्त है। जबकि खनन माफियाओं को संरक्षण देने के आरोप में डोमनपुर के लेखपाल अतुल को एस डी एम  नरवल ने निलंबित कर दिया है।
आपको बता दे कि कानपुर में इन दिनों खनन जोरों पर है। खनन की सूचना पर एक निजी चैनल के पत्रकार खनन की कवरेज हेतु फत्तेपुर पहुंचे और मौके पर ही एक डंफर पुलिस से पकड़वा भी दिया।


यह बात अलग रही की थाने से सेटिंग के चलते खनन माफिया थाने से डंफर लेकर नौ दो ग्यारह हो गया। इस खबर को टीवी चैनल के पत्रकारों ने इस कदर चलाया कि खनन माफिया को टीवी चैनल के मालिक से मजबूरन समझौता करना पड़ा इसीलिए कहा गया है कि हिंदुस्तान में बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रुपैया ।


समझौता राशि के बदले चैनल के मालिक ने खनन माफिया को ना सिर्फ अपने चैनल का रिपोर्टर बना दिया बल्कि खनन माफिया के खिलाफ चलाई ख़बर को यू ट्यूब से डिलीट भी कर दिया और अब खनन माफिया पत्रकारिता का चोला ओढ़ कर बेधड़क खनन कर रहा है।


ब्यूरो रिपोर्ट । 

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