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Monday, 2 December 2019

क्राईम ब्रांच की टीम ने लूटा व्यापारियों का सोना..दरोगा समेत तीन निलंबित





मिर्जापुर - ट्रेन से बांदा जा रहे दो व्यापारियों से लाखों रुपये का सोना किसी लुटेरे ने नहीं बल्कि मिर्जापुर जिले की क्राइम ब्रांच की टीम ने लूटा था। तीन दिन पहले हुए मामले का पता चलने पर एसपी डा. धर्मवीर सिंह ने क्राइम ब्रांच के दरोगा धनंजय पांडेय, आरक्षी मनीष चौबे व धर्मवीर यादव को निलंबित कर दिया है। व्यापारी ने एसपी से पुलिस की इस करतूत की शिकायत की थी। एसपी ने बताया कि मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी है। जांच के बाद आरोप सिद्ध पाए जाने पर दरोगा व सिपाहियों को जेल भेजने की कार्यवाही की जायेगी। इस मामले में जीआरपी की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है क्योंकि रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी फुटेज में ट्रेन से व्यापारियों को उठाने का फुटेज आने के बावजूद जीआरपी ने पूरे मामले से अनभिज्ञता जताई थी।

बांदा के व्यापारी अंश सोनी, अर्जुन कुमार गुप्ता व राममूरत सोनी सोने के जेवरात का आर्डर लेने के बाद मिर्जापुर के कारीगरों से तैयार कराकर सप्लाई करते हैं। 27 नवबंर की सुबह भी सोना लेकर सप्लाई के लिए ट्रेन से मानिकपुर जा रहे थे। जैसे ही तीनों ट्रेन में चढ़े, तभी तीन व्यक्ति ट्रेन में चढ़े और खुद को स्पेशल ब्रांच का बताते हुए व्यापारियों को पकड़ लिया और तीनों को ट्रेन से उतारकर रेलवे कालोनी परिसर में खड़ी सफेद रंग की टाटा सफारी में बैठकर पथरहिया रोड ले गये । 




इसके बाद अर्जुन के जेब में रखा सोने का हार व 22 हजार रुपये नगदी, रामसूरत के जेब से सोने का झूमका छीन लिया। विरोध करने पर मारते पीटते हुए धमकी दी कि शोर मचाने पर मुकदमे में बंद करा दूंगा तो जिंदगी भर जेल में रहोगे। 

लुटेरों ने व्यापारियों को लूटने के बाद जंगीरोड स्थित कोणार्क होटल के पास प्रयागराज जा रही रोडवेज बस पर बैठा दिया। कहाकि प्रयागराज चले जाओ लेकिन तीनों नटवां तिराहे पर बस रोककर उतर गये और गणेशगंज निवासी अपने रिश्तेदार व्यापारी के यहां पहुंचकर आपबीती सुनायी। जिस पर व्यापारी ने एसपी से शिकायत कर मामले से अवगत कराया जानकारी मिलते ही एसपी ने जांच शुरू की और प्रथम दृष्टया क्राइम ब्रांच के दरोगा व दो सिपाही को दोषी पाते हुए निलंबित कर दिया।

किसी नेता की सफारी से गयी थी टीम

सोना लूटने के मामले में जिले के किसी नेता की सफेद रंग की सफारी का प्रयोग किया गया था। वह विभाग के ही किसी सिपाही के नाम पर ली गयी थी। इसकी चर्चा भी काफी जोरों पर रही।

पहले भी क्राइम ब्रांच पर उठ चुके है सवाल

क्राइम ब्रांच की टीम पर पहले भी कई आरोप लग चुके हैं। जिसमें माल पक़ड़ने के बावजूद छोड़कर लाखों रुपये का माल हजम कर गये हैं लेकिन मामला प्रकाश में नहीं आने पर दबा ही रह गया। यदि शिकायत की गयी होती तो मामला प्रकाश में आता। कुछ महीने पहले भी क्राइम ब्रांच के सिपाहियों पर सवाल उठे थे कि लाखों रुपये के हेरोइन व तस्कर को पकड़ा था लेकिन मामले का खुलासा करने की जगह सिपाहियों ने ही खेल कर दिया था। सिपाहियों ने तस्कर को छोड़ दिया और पकड़े गए मादक पदार्थ को नगर के ही एक व्यक्ति को लाखों रुपये में बेच दिया था। सिपाहियों के इस करतूत की भी काफी दिनों तक चर्चा चली थी।


जीआरपी की भूमिका भी रही संदिग्ध

मिर्जापुर व्यापारियों से सोने का आभूषण लूटे जाने के मामले में जीआरपी की भी भूमिका संदिग्ध रही यदि जीआरपी की मंशा साफ होती तो उसी दिन मामला खुल जाता लेकिन जीआरपी उस दिन पूरे मामले से अनभिज्ञता जताती रही । यह काफी हास्यास्पद मामला है कि किसी ट्रेन से यात्रियों को उतारा जा रहा है और स्टेशन पर थाना होने के बावजूद जीआरपी के किसी सिपाही तक ने मुंह नहीं खोला। प्रभारी निरीक्षक भी पूरे मामले से अनभिज्ञ रहे। आरपीएफ को भी इस मामले की जानकारी नहीं हो पायी । 

HT

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